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रहस्य- क्या हिममानव येति धरती पर मौजूद हैं !

By: एडिटर   2 September, 2012

yeti-mystery

हिममानव यानि येति को दिखने का जब भी दावा किया जाता हैं। इसके अस्तित्व पर सवाल उठ खड़े होते हैं । क्या हिममानव का अस्तित्व ह। और यदि इस बर्फिले इलाके में हिममानव रहता है तो कहां है हिममानव का ठिकाना। साथ ही इस निर्जन बर्फिले इलाके में वो रहस्यमयी जीव कैसे जिंदा रहता है । इस तरह के तमाम सवाल सबके जेहन में उठता ह। लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है,दरअसल हिममानव को जब भी देखा गया है वो थोड़ी देर के लिए तो दिखाई देता है लेकिवन पल भर में गायब हो जाता है.और वो रहस्यमयी जीव कहां बर्फ में गुम में हो जाता है ये आज भी रहस्य बना हुआ है।  हिममानव कितना रहस्यमयी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत नेपाल और तिब्बत के दुर्गम और निर्जन हिमालय क्षेत्र में सैकड़ों बर्षों से लोग इसे देखते आ रहे हैं.. लेकिन इंसान हिममानव के पहुंच से अब तक हर दूर है। रहस्यमयी हिममानव यानि येति के अस्तित्व को लेकर तमाम तरह की बातें कही जाती है। येति को देखने का दावा करने वालों का कहना है कि घने बालों वाला ये रहस्यमयी प्राणी सात से नौ फीट लंबा दिखता है जबकि इसका वजन तकरीबन दो सौ किलो हो सकता है। और इसकी खासियत है कि ये इंसान की तरह चलता है ऐसा कहा जाता है कि ये रहस्यमयी भीमकाय जीव रात में शिकार करता है और दिन में सोता रहता है लेकिन येति कभी कभार दिन में भी इंसान को दिख जाता है। इस रहस्मयी हिम मानव के बारे में जानने की कोशिश लगातार की जा रही है लेकिन येति इंसान के पहुंच से आज भी दूर है हो सकता है येति की अपनी दुनिया हो जहां वो इंसान की पहुंच से दूर बर्फ में सैकड़ों की तादाद में रहता हो या ये भी हो सकता है कि हिममानव की तादाद बहुत कम हो और वो अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए निर्जल बर्फिले इलाके में छिपने में माहिर हो गया हो लेकिन इस तमाम तरह के कयास से परदा तभी उठ पाएगा जब हिममानव तक इंसान पहुंच पाएगा।

हिममानव यानि येति दुर्गम बर्फिले इलाके में सदियों से इंसान को दिखता रहा है  लेकिन हिममानव के रहस्य से परदा नहीं उठ पाया है । आखिर ये हिममानव बर्फिले इलाके में कहां रहता है और कहां गायब हो जाता है । हिममानव के बारे में दुनिया को पहली बार तब पता चला जब 1832 में बंगाल के एशियाटिक सोसाइटी के जर्नल में एक पर्वतारोही ने येति के बारे जानकारी दी । जिसमें ये कहा गया कि उत्तरी नेपाल में ट्रैकिंग के दौरान उसके स्थानीय गाइड ने एक ऐसे प्राणी को देखा जो इंसान की तरह दो पैरो पर चल रहा था । जिसके शरीर पर घने वाल थे । उस प्राणी को देखते ही वो डर कर भाग गया। इसके बाद 1889 में एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में पर्वतारोहियों ने बर्फ में ऐसे किसी प्राणी का फुट प्रिंट देखा जो इंसान की तुलना में काफी बड़े थ। 20वीं सदी की शुरूआत में भी येति को देखने के मामले तब ज्यादा आने शुरू हुए जब पश्चिमी देशों के पर्वतारोहियों ने हिमालय के इस क्षेत्र की चोटियों पर चढ़ने का प्रयास शुरू किया और फिर 1925 में रॉयल ज्योग्रॉफिकल सोसाइटी के एक फोटोग्राफर ने 15,000 फीट ऊंचाई वाले जेमू ग्लेशियर के पास एक विचित्र प्राणी को देखने की बात कही उस फोटोग्राफर ने बताया कि उस विचित्र प्राणी को 200 से 300 गज की दूरी से उसने करीब एक मिनट तक देख जिसकी आकृति ठीक-ठीक इंसान जैसी थ वो सीधा खड़े होकर चल रहा था और झाड़ियों के सामने रूक-रूक कर पत्तियां खींच रहा थ। बर्फ में वो काला दिख रहा था। इसके बाद 1938 में येति एक बार फिर चर्चा में आया विक्टोरिया मेमोरियल, कलकत्ता के क्यूरेटर एक कैप्टेन ने हिमालय की यात्रा के दौरान देखने का दावा किया,जिसमें कैप्टन ने उसे एक उदार और मददगार प्राणी बताया । कैप्टन के मुताबिक इस यात्रा के दौरान जब वो बर्फीली ढलान पर फिसल कर घायल हो गये थे तब प्रागैतिहासिक मानव जैसे दिखने वाले एक 9 फीट लंबे प्राणी ने उसे मौत के मुंह से बचाया था। 1942 में भी साइबेरिया के जेल से भागने वाले कुछ कैदियों ने भी हिमालय पार करते हुए विशाल बंदरों जैसे प्राणी को देखने का दावा किया
लेकिन पहली बार ठोस सबूत तब मिला 1951 में एवरेस्ट चोटी पर चढ़ने का प्रयास करने वाले एक पर्वतारोही ने 19,685 फीट की ऊंचाई पर बर्फ पर बने पदचिन्हों के तस्वीर फोटो लिए जिसका आज भी गहन अध्ययन किया जा रहा है बहुत से लोग मानते हैं ये फोटो येति की वास्तविकता का बेहरतीन सबूत हैं लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि ये किसी दूसरे सांसारिक जीव के हैं,इतना ही नहीं 1953 में सर एडमंड हिलरी और तेनजिंग नोर्गे ने भी एवरेस्ट चढ़ाई के दौरान बड़े-बड़े पदचिह्न देखने की बात कही और फिर 1960 में सर एडमंड हिलेरी के नेतृत्व में एक दल ने येति से जुड़े सबूतों को इक्ट्ठा करने के लिए हिमालय क्षेत्र की यात्रा की जिसमें इंफ्रारेड फोटोग्राफी की मदद ली गयी लेकिन 10 महीने वहां रहने के बाद भी इस दल को येति के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल पाये इसके एक दशक बाद 1970 में एक ब्रिटिश पर्वतारोही ने दावा किया कि अन्नपूर्णा चोटी पर चढ़ने के दौरान उन्होंने एक विचित्र प्राणी को देखा और रात में कैम्प के नजदीक विचित्र तरह के चीत्कार सुने.. उनके शेरपा गाइड ने बताया कि ये आवाज येति की है.. सुबह उस कैम्प के नजदीक इंसान जैसे बड़े पदचिन्ह भी देखे.. हाल के दिनों में येति देखने की बात करें तो 1998 में एक अमरीकी पर्वतारोही ने एवरेस्ट से चीन की तरफ से उतरते हुए येति के एक जोड़े को देखने का दावा किया उस पर्वतारोही के मुताबिक दोनों के काले फर थे और वे सीधे खड़े होकर चल रहे थे  2008 में भी मेघालय में हिममानव यानि येति को देखने का दावा किया गया जिसे गारो हिल्स की पहाड़ियों में देखा गया लेकिन किसी के ठिक सामने आज तक नहीं आया है। हो सकता है इस हिममानव का हिमालय के क्षेत्रो में अस्तित्व हो, जो इंसान के सामने नहीं आना चाहाता हो ऐसे में जब तक इंसान हिममानव तक नहीं पहुंच जाता ये प्राणी रहस्यमयी बना रहेगा ।

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